ऋषि-मशरूम
मशरूम की खेती

ऋषि मशरूम काश्त की विधि : खाने के 10 खास फायदे और साइड इफेक्ट Step-By-step 2020

ऋषि मशरूम (गैनोडरमा लुसीडम):

ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) को गैनोडरमा लुसीडम, गैनोडरमा मशरूम के रूप में भी जाना जाता है । ऋषि मशरूम लाभ से भरपूर है । ऋषि मशरुम ( reishi mushroom) एक कवक है जो एशिया में विभिन्न गर्म और नम स्थानों में उगता है।

ऋषि मशरूम चीन और जापान जैसे एशियाई देशों में एक दवा या टोनिक जड़ी बूटी के रूप में उपयोग करते है ।

प्राचीन काल से वे मानते हैं कि यह मशरुम एक प्रकार का पवित्र मशरूम है , और वो इस मशरुम को एक दवा के रूप में बहुत समय से उपयोग करते रहे है । अब दुनिया भी ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) के फायदे को जानने लगी है ।

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ऋषि-मशरूम

ऋषि-मशरूम
ऋषि मशरूम

ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) की अनेकों किस्में हमारे देश में भी पायी जाती है। ऋषि मशरूम के औषधीय गुणों के मद्देनजर इस मशरूम का व्यावसाहिक स्तर पर उत्पादन हो रहा है। इस मशरूम को आम, पॉपलर, नारियल, शीशन वृक्षों के बुरादे पर आसानी से उगाया जा रहा है।

ऋषि मशस्म ( Reishi mushroom) का वर्तमान में वैश्विक व्यापार लगभग 3 बिलियन डॉलर है। भारत चीन और मलेशिया से 100 मिलियन डॉलर का मशरुम आयात करता है।

ऋषि मशरूम में एच.आई.वी रोधी , मधुमेह रोधी , कैंसर रोधी , हार्ट अटैक रोधी आदि अनेक गुण बताए गए हैं । जापान व चीन की औषधी पद्धति मे इस मशस्म से सभी बीमारियों का इलाज बताया गया है।

ऋषि मशरूम काश्त की विधि:

Step 1 –

लकडी के बुरादे में गेहूँ का चोकर (20 प्रतिशत), कैल्शियम सल्फेट (2 प्रतिशत) व कैलशियम कार्बोनेट (0.5 प्रतिशत) मिलाया जाता है व बुरादे वाले माध्यम को फिटकरी के पानी से गीला कर pH 5.5-6.0 की जाती है।

Step 2 –

दस बारह घंटे पश्चात इस माध्यम को प्रोलीप्रोपाइलिन (Polypropylene) के थैलों में एक किलो प्रति थैले के हिसाब से भरकर प्लास्टिक के पाइप से बुरादे से भरे हुए थैले के बीच में स्पान हेतू जगह बना देते हैं ।

इसके उपरान्त थैले पर नैक रिंग चढाकर ऊपर से रुई से मुँह बन्द कर देते हैं व दो घंटे के लिए 126.5° सेल्सियस पर ऑटोक्लेव करते है।

Step 3 –

ठण्डा होने पर 3 प्रतिशत की दर से रिशी मशरूम के स्पान से लेमीनार एयर-फ्लो में उपरोक्त थैलों में निवेश (Inoculation) करते हैं । निवेशित किए हुए थैलों को 24 से 25° सेल्सियस पर उष्मायित करते हैं।

Step 4 –

लगभग 22 से 25 दिनों में रिशी मशरूम की फफूँद बुरादे माध्यम में पूरी तरह फैल जाती है । इस समय थैलों का मुंह बुरादे की सतह तक काट दिया जाता है।

खुले हुए थैलों को 28-30 सेल्सियस, 90-95 प्रतिशत आर्द्रता, 1500 पीपीएम कार्बन डाइआक्साइड व 800 लक्स लाइट में रखा जाता है।

ऋषि-मशरूम-की-लाल-रंग-की-कलिकाएं

ऋषि-मशरूम-की-लाल-रंग-की-कलिकाएं
ऋषि मशरूम की लाल रंग की कलिकाएं

उपरोक्त दशाओं में कुछ दिनों में मशरूम की लाल रंग की कलिकाएं निकलनी प्रारम्भ हो जाती है जिनकी टोपी सफेद रंग की होती है । 

Step 5 –

जब यह टोपी फ्लैट होने शुरु हो जायें, उस समय हवा का कमरे में आगमन कर कार्बन डाइआक्साइड की मात्रा घटा दी जाती है (1000 पी.पी.एम.) आदता 80 प्रतिशत कर दी जाती है।

जब इन कलिकाओं की टोपी का किनारा हल्का पीला पड़ने लगे उस समय कमरे का तापमान 25* सेल्सियस पर रखने से और आद्रता को 60 प्रतिशत तक कम करने से मशरूम की कलिका लाल रंग की होगी व मोटी होना शुरू हो जायेगी।

पूर्णतया पकी हुई ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) की टोपी भूरे लाल रंग व टोपी पर गहरे भूरे लाल रंग के स्पोर गिरने शुरु हो जायेंगे । एक बार में लगभग 15 दिन ऋषि मशरूम के पकने में लगते हैं। इन मशरूम को चाकू से बुरादे से सटाकर काट लेना चाहिए।

Step 6 –

पहली तोड़ाई के उपरान्त से 28 से 30° सैल्सियस तापमान उच्च आर्द्रता 90 प्रतिशत व 1500 पी.पी.एम. कार्बन डाइआक्साइड कमरे में करने से दूसरी बारी मशरूम कलिकाएँ निकलनी शुरु हो जायेगी इस तरह एक ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) की फसल लगभग चार महीने में पूर्ण होती है।

मशरूम कहाँ बेचे :

तुड़ाई की हुई मशरूम को साफ करने के बाद काम तापमान पर लगभग 50 डिग्री सेल्सियस पर सुख ले, सामान्य 35° सेल्सियस पर सुखाने पर लगभग एक किलो ताजा ऋषि मशरूम से 45-50 ग्राम सूखी मशरूम प्राप्त हो जायेगी।

इस ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) को औषधी के रूप में प्रयोग में लाया जाता है इसलिए इस मशरूम के उत्पादन से पहले हर्बल व फार्मा कम्पनियों से सम्पर्क करें ताकि उत्पाद को बेचकर लाभ कमा सके ।

ऋषि मशरूम ( Reishi Mushroom ) खाने के 10 खास फायदे :

1. कैसर रोधी गुण ( Anti – Cancer Properties )

ऋषि मशरुम ( Reishi mushroom) में एक महत्वपूर्ण और संभावित गुण पाया जाता है जो कैसर से लड़ने में सहायता करता है । एक अध्ययन से पता चलता है कि ऋषि मशस्म लेने से स्तन कैंसर रोगियों को लाभ मिलता है ।

ऋषि मशस्म ( Reishi mushroom) सफेद रक्त कोशिकाओं की गतिविधि को बढ़ाता है , जो कैंसर से लड़ने और कैंसर रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है।

2.प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है ( Boosting the immune system ) :

प्रतिरक्षा प्रणाली एक जीव की रक्षा प्रणाली होती है , जिसमें एक जीव के भीतर कई जैविक सरचना और प्रक्रिया को शामिल होती है जो बीमारी से बचाता है ।

प्रतिरक्षा प्रणाली उन अंगों से बनी होती है जो कुछ रक्षा कोशिकाओं के उत्पादन और परिपक्वता को नियत्रित करते है । अस्थि मज्जा ( Bone marrow ) रक्षा कोशिकाओं का उत्पादन करता है ।

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि ऋषि मक्षस्म ( Reishi mushroom) हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।

3. एंटी – हार्ट अटैक गुण ( Anti – heart attack ) :

ऋषि मशरुम मे ” HDL कोलेस्ट्रॉल ( जिसे अच्छे कोलेस्ट्रॉल के रूप में भी जाना जाता है ) को बढ़ाने में मदत करता है , और ट्राइग्लिसराइड्स ( आपके रक्त में पाया जाने वाली वसा को काम करने में मदत करता है ।

यह आपको दिल की समस्याओं से बचने में मदद कर सकता है । कुछ अध्ययनों से पता चला है कि ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) अच्छे कोलेस्ट्रॉल में सुधार कर सकता है ।

4.मधुमेह ( Anti – diabetes ) :

मधुमेह एक बीमारी है जो तब होती है जब आपका रक्त शर्करा ( Blood sugar ) बहुत अधिक होता है ।

ब्लड शुगर आप की ऊर्जा का मुख्य स्रोत है जो आपके द्वारा खाए गए भोजन से आता है । कुछ अध्ययनों से पता चला है कि ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) रक्त शर्करा में सुधार कर सकता है ।

5. नींद में सुधार और कम थकान ( Improve sleep & lessen fatigue ) :

ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में मदत करता है । ये थकान और अवसाद को कम करने में मदद करता है । जो अच्छी नीद लेने में मदत करता है, साथ ही जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ाता है ।

 6. उच्च रक्तचाप ( High Blood Pressure ) :

उच्च रक्तचाप तब होता है जब आपका रक्तचाप खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है । कुछ अध्ययनों से पता चला है कि ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है ।

7. HIV / AIDS :

ऋषि मशरूम एक औषधीय मशरूम है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है जो एचआईवी संक्रमण वाले लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है । कुछ अध्ययनों में पाया गया कि उबले हुए सूखे एशियाई  जिनसेंग ( जिसे लाल जिनसेंग भी कहा जाता है ) को एचआईवी से सक्रमित लोगों में लाभकारी पाया गया है ।

8. श्वसन संबंधी रोग ( Respiratory diseases ) :

श्वसन संबंधी रोग एक प्रकार का रोग जो फेफड़ों और श्वसन प्रणाली के अन्य भागों को प्रभावित करता है । ये बीमारियाँ तम्बाकू धूमपान करने या वायु प्रदूषण के अन्य रूपों के कारण हो सकती है ।

श्वसन रोगो में अस्थमा , कौनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज ( सीओपीडी ) , और फेफड़ों का कैसर शामिल है । कुछ अध्ययनों से पता चला है कि ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) श्वसन सबधी रोगों में एक महत्वपूर्ण भूमिम निभा सकता है ।

9. शक्ति ( strength ) और आंतरिक बल ( stamina ) बढ़ाएँ :

कुछ अध्ययन में पाया गया कि ऋषि मशरूम में शरीर की ताकत और आतरिक बल बढ़ाने की क्षमता है । कुछ रिपोर्ट ये भी दिखते है कि पीनी सरकार ने अपने खिलाड़ियों को ताकत और आतरिक बल बढ़ाने के लिए ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) दिया । 

10 एंटीऑक्सीडेंट ( Antioxidant ) :

एटीऑक्सिटेट जैसे विटामिन  C या E  जो मानत में संभावित हानिकारक ऑक्सीकरण एजेंटो को हटा देता है । अगर हम उच्च आहार के भोजन ले जिसमें एटीऑक्सिटेट भरपूर मात्रा में हो तो वे कई बीमारियों के जोखिम को कम कर सकता है , जिसमे ह्रदय रोग और कुछ कैसर भी शामिल है ।

ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) को एक एटीऑक्सिडेट के रूप में लिया जा सकता है ।

ऋषि मशरूम के साइड इफेक्ट्स :

लौ ब्लड प्रेशर मे ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) लेने से बचे क्योकि कुछ अध्ययनों मैं देखा गया है की ऋषि मशरूम ब्लड प्रेशर को कम कर सकता है । अगर आपकी सर्जरी हुई है तो आपको इस मशरूम को लेने से बचना चाहिए ।

कुछ कुछ मामलों में ऋषि मशरूम ( Reishi mushroom) मुंह , गर्ने और नाक में सूखापन जैसे अन्य दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है । हम यह भी सलाह देते ह कि गर्भवती या स्तनपान करने वाली महिलाओ को ऋषि मशरूम लेने से बचना चाहिए ।

यदि आप उच्चा खुराक ले रहे है तो यह आपके पेट के हाजमे को बिगाड़ सकता है । ऋषि मशरूम spores को सुघने से एलजी हो सकती है ।

हालाकि ये प्रभार मामूली है और जो लम्बे  समय लिए कोई प्रभाउ नही डालते है । ऋषि मशरूम के शोध में यह बात सामने आई है कि किसी ने भी सरकार के सामने सही आकड़े नहीं रखे हैं । इसलिए अभी तक ऋषि मशरूम के बारे में जानकारी की बहुत कमी है ।

रिशी मशरूम की खुराक :

मशरुम लेना आपकी उम , आपके वजन , आपके लिंग और बहुत सी चीजों पर निर्भर करता है।

मशरूम की मात्रा : 1.4 से 8 ग्राम सूखे मशरूम और 1 से 1.5 ग्राम ऋषि पाउडर दिन में 2 बार।

मशरूम की खेती की ट्रेनिंग :

भारत मैं मशरुम की खेती का प्रशिक्षण बागवानी विभाग से ले सकते है इसकी वेबसाइट https://hortnet.gov.in/ है।

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SUNIL YADAV
I was born into a farmer's family in a village near Banaras. I completed my studies in mechanical engineering and I am the first engineer in my village. Since childhood, I have been more attracted to nature and wanted to do something that would keep me connected to farms and farmers. I love to do research and collect the latest information about agriculture, horticulture and then I write articles about them. If my farmer brothers benefit even a little from the articles I write, I will consider myself very lucky.

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