मशरूम का वर्गीकरण:

भारत-में-मशरूम-उत्पादन

भारत-में-मशरूम-उत्पादन
भारत में मशरूम उत्पादन

नमस्कार दोस्तों आज मैं एक बहुत ही ज्यादा important आर्टिकल “भारत में मशरूम उत्पादन की संभावनाये और उनका वर्गीकरण 2020” लेकर आया हूँ.

मशरूम में कई ऐसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जिनकी शरीर को बहुत आवश्यकता होती है. साथ ही ये फाइबर का भी एक अच्छा माध्यम है.

मशरूम में कई महत्वपूर्ण खनिज और विटामिन पाए जाते हैं. इनमें विटामिन बी, डी, पोटैशियम, कॉपर, आयरन और सेलेनियम की पर्याप्त होती है.

इसके अलावा, मशरूम में कोलीन (choline) नाम का एक खास पोषक तत्व पाया जाता है जो मांसपेशियों की सक्रियता और याददाश्त बरकरार रखने में बेहद फायदेमंद रहता है

कई बीमारियों में मशरूम का इस्तेमाल दवाई के तौर पर किया जाता है. हेल्थ कॉन्शस लोगों के लिए भी यह अच्छा होता है, क्योंकि इसमें कैलोरीज ज्यादा नहीं होतीं.

आदिकाल से ही मशरूम को जंगलों से इकटठी कर के खाने का प्रचलन रहा है। व्यावसायिक स्तर पर विभिन्न प्रकार की मशरूम का उत्पादन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही शुरू हुआ।

बटन मशरूम की व्यवसायिक खेती यूरोपीय देशों में सोलहवी व सतरहवीं सदी में हुई। 20वीं सदी के starting में बटन मशरूम का उत्तको (टिशु) व सूक्ष्मदर्शी बीजाणुओं से शुद्ध कल्चर बनाने में सफलता मिली।

यह मशरूम की वैज्ञानिक रूप में व्यवसायिक खेती में पहला पड़ाव था

दूसरा मुख्य पड़ाव जिस से बटन मशरूम की खेती को बढावा मिला वह था 1951 के आस पास टनल में खाद बनाना। तीसरा पड़ाव था 1982 में मशरूम में पहली हाइब्रिड किस्म यु-1।

वर्तमान में मशरूम को इसकी पोषकता, औषधीय गुणवत्ता तथा आय के उत्तम साधन के रूप में 100 से भी अधिक देशों में उगाया जा रहा है विश्व का मशरूम उत्पादन लगभग 500 लाख टन प्रति वर्ष है और इसमें 8-10 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से वृद्धि हो रही है।

विश्व उत्पादन में विभिन्न मशरूम का योगदान:

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Contribution-of-various-mushrooms-in-world-production

विश्व में कुल मशरूम उत्पादन का 90% मशरूम छः प्रजातियों:

1. शिटाके मशरूम (Shiitake Mushroom) (22%),

2. ढिंगरी मशरूम (Oyster mushroom) (19%),

3. कनचपटा मशरूम (Wood Ear Mushroom) (18%),

4. बटन मशरूम (Button Mushroom)(15%).

5. इनोकी मशरूम (Inoki) (11%) 

6. पुआल मशरूम (Straw mushroom) (5%) की खेती से होता है.

भारत और विश्व में उत्पादन और संभावनाएँ:

Chanterelle-Mushroom

विकसित देशों में विशेषकर यूरोप व अमेरिका देशों में मशरूम एक बड़ी औद्योगिक इकाई के रूप में गिनी जाती है।

इन देशों में बड़े स्तर पर 10000-20000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष पैदावारी के लिये इकाईयों में आशातीत सफलता मिली है।

इन इकाइया में उत्तम दर्जे की मशीनों व कंप्यूटर द्वारा वातावरण संचालन किया जाता है। इसके अतिरिक्त इन देशों में एकीकृत खाद व बीज बनाने की इकाईयां हैं।

चीन कम उत्पादन लागत में की जाने वाली मशरूम की सफल तरीके से मौसमी और सहकारी खेती का एक जीवंत उदाहरण है।

 

इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार की विशिष्ट मशरूम के उत्पादन की तरफ ध्यान देने से चीन विश्व में एक मुख्य मशरूम उत्पादक देश के रूप में उभरा है व विश्व के मशरूम उत्पादन का लगभग 85 प्रतिशत पैदावार कर रहा है।

पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न विशिष्ट मशरूम के उत्पादन में वृद्धि के कारण विश्व उत्पादन में बटन मशरूम का हिस्सा घटा है और ऑयस्टर मॅशरूम, शिटाके और कनचपटा मशरूम का हिस्सा बड़ा है। इन खाद्य मशरूम के अतिरिक्त कुछ औषधीय मशरूम के उत्पादन में भी चीन एक प्रमख देश है।

Button-White-Mushrooms

भारत में भी मशरुम उत्पादन में तेजी से व्रद्धि हो रही है। मशरुम उत्पादन व्यवसाय में युवाओं व किसानों की मशरूम में रूचि दिन प्रति दिन बढ़ रही है।

मशरूम खपत तथा मांग लगातार बढ़ती जा रही है। भारतवर्ष में विविध प्रकार का मौसम व बहुतायत में विभिन्न प्रकार के कृषि अवशेष उपलब्ध है तथा सस्ती मानव क्षमता आसानी से मिल जाती है।

इसलिए यहां पर सभी प्रकार की मशरूम पैदा की जा सकती हैं।

ऐसा अनुमान है कि भारतवर्ष में प्रतिवर्ष लगभग 7000 लाख टन कृषि अवशेष उत्पन्न होते हैं, और इनमें से काफी बड़ा हिस्सा खेतों में ही जला दिया जाता है,अथवा सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है इसका 1% भी यदि मशरूम उत्पादन के लिए प्रयोग किया जा सके तो भारत में 40 लाख टन से ज्यादा मशरूम पैदा हो सकती हैं और भारतवर्ष एक प्रमुख मशरूम उत्पादक देश बन सकता है।

भारतवर्ष में में मशरूम उत्पादन यद्यपि 1961 के दशक में शुरू हो गया था परंतु इसे अपेक्षित गति 1991 के दशक में मिली और मशरूम उत्पादन वर्ष 1985 में 5000 टन से बढ़कर 1995 में 40000 टन प्रति वर्ष हो गया था|

2016 में भारत में मशरूम की पैदावार लगभग 140000 मैट्रिक टन प्रतिवर्ष थी और आशा है कि भविष्य में और बढ़ेगी। एक अनुमान के अनुसार 2019 में भारत में कुंभ उत्पादन 184000 मीट्रिक टन था।

भारत के अलग अलग प्रदेशों में मशरूम उत्पादन:

भारत में मुख्य तौर से चार मशरूम (बटर मशरूम,ढीगरी मशरूम ,पुआल मशरूम व दूधिया मशरूम )व्यावहारिक स्तर पर उगाई जाती है। बटन मशरूम का 73% ,ढीगरी मशरूम का 16%, पुआल मशरूम का 8% व दूधिया मशरूम का 3% योगदान है।

अलग-अलग-मशरुम-का-साल-2018-मैं -कुल-उत्पादन

अलग-अलग-मशरुम-का-साल-2018-मैं -कुल-उत्पादन
अलग अलग मशरुम का साल 2018 मैं कुल उत्पादन

उत्तर भारत में बटन मशरूम, दक्षिण भारत में ढिगरी व दूधिया मशरूम व उत्तरी पूर्वी राज्य में पुआल व ढिंगरी मशरूम व्यापक स्तर पर उगायी और खाई जाती है।

देश में दो प्रकार के मशरूम उत्पादक हैं, एक जो पूरे वर्ष वातावरण नियंत्रित यूनिटों में मशरूम उत्पादन करते हैं और दूसरे वे जो मौसम आधारित मशरूम उत्पादन करते हैं।

बटन मशरूम की खेती ही नियंत्रित यूनिटों में की जाती है। अन्य सभी मुशरूमो की खेती मौसमी आधार पर ही की जाती है।

देश में बटन मशरूम का लगभग 90% उत्पादन वातावरण नियंत्रित यूनिटों में से आता है और 9 से 10% मौसम आधारित मशरुम उत्पादन से हो रहा है हरियाणा में दोनों तरह से बटन मशरूम का उत्पादन हो रहा है और दोनों का योगदान लगभग एक जैसा ही है।

अलग-अलग-प्रदेशों-में-मशरूम-उत्पादन

अलग-अलग-प्रदेशों-में-मशरूम-उत्पादन
अलग अलग प्रदेशों में मशरूम उत्पादन

 

देश में वैसे तो लगभग हर राज्य में मशरूम उत्पादन हो रहा है, फिर भी पंजाब, गुजरात, हरियाणा, तमिलनाडु, उड़ीसा,उत्तराखंड,हिमाचल प्रदेश व महाराष्ट्र जैसे राज्यो में सालाना 11000 मीट्रिक टन से अधिक मशरुम उत्पादन हो रहा है।

देश व विश्व में लगातार मशरूम की मांग बढ़ रही है व आपूर्ति कम है।

पश्चिमी देशों में मशरूम की पैदावार अब उस गति से नही बढ़ रही है जबकि मांग उन देशो में निरंतर बढ़ रही है।

भारत देश में मशरूम का उत्पादन बढ़ाने व निर्यात करने की अनुकूल परिस्थिती है। हमारे देश में समशीतोष्ण (कम गर्म) एव उष्ण (गर्म) मशरूम की पैदावार बढ़ाने की काफी संभावनाएं है।

चार प्रजातियों के इलावा भी कई अन्य प्रकार के मशरूम की काश्त हमारे देश में हो सकती है और कुछ किसानों ने इसकी शुरूआत की है।

ये आर्टिकल आप को कैसा लगा हमको जरूर बताये। 

भारत मैं मशरुम की खेती का प्रशिक्षण बागवानी विभाग से ले सकते है इसकी वेबसाइट https://hortnet.gov.in/ है। 

ये भी पढ़े: कैसे एक इंजीनियर बना सफल किसान? अभी पढ़िए पूरी कहानी 2020

 

 

 

 

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SUNIL YADAV
I was born into a farmer's family in a village near Banaras. I completed my studies in mechanical engineering and I am the first engineer in my village. Since childhood, I have been more attracted to nature and wanted to do something that would keep me connected to farms and farmers. I love to do research and collect the latest information about agriculture, horticulture and then I write articles about them. If my farmer brothers benefit even a little from the articles I write, I will consider myself very lucky.

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