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मशरूम की खेती

मशरुम फार्म बनाने से मशरुम बेचने तक बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियाँ 2020

 

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मशरुम फार्म बनाने से मशरुम बेचने तक बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियाँ :

मशरुम की खेती हम पूरे साल कर सकते है और अच्छा खासा मुनाफा भी काम सकते है। बटन मशरुम को भारत में बहुत पसंद किया जाता है इस लिये किसान और युवा भी बटन मशरुम की खेती करना ज्यादा पसंद करते है।

बटन मशरुम की खेती तो वैसे सर्दियों की खेती है पर आज कल वातानुकूलित कमरों में ये खेती बारह महीनों की जाती है। वातानुकूलित कमरों का निर्माण करना बहुत रुपये का काम है। इस लिये ये जरूरी हो जाता है कि युवा किसान भाइयों को इस खेती के बारे में अच्छा ज्ञान हो।

कभी कभी सही ज्ञान की कमी के कारण मशरुम मैं रोग लग जाते है। अगर हमें मशरुम की खेती का सही ज्ञान हो तो हम मशरूम में लगने वाले रोग उनकी पहचान, उनका नियंत्रण तथा उपचार भी कर सकते है।

पर अगर समस्या के आने से पहले ही आप सभी मापदंडों का पालन करे तो ये समस्या आयेगी ही नही ओर आप का पैसा और आप का समय दोनों की बचत होगी।

अगर आप ने हमारी बताई गई सभी बिंदुओं पर ध्यान दिया तो आप सालो साल मशरुम की अच्छी पैदावार ले सकते है ओर अच्छा खासा मुनाफा भी कमा सकते है।

मशरूम फार्म बनाते वक्त बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियाँ :

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जैसा कि हम जानते है कि मशरुम में भी कई तरह की बीमारियां लगने का डर हमेशा बना रहता है। इससे किसानों को हर साल बहुत ज्यादा नुकसान होता है, कुछ जरुरी सावधानी बरत के इस नुकसान से बचा जा सकता है। किसी भी मशरूम की खेती विशेष तापमान पर विशेष स्थिति में की जाती है ।

मशरूम फार्म लगाते वक़्त कुछ बातों का अध्ययन अच्छी तरह कर लेना चाहिए जैसे :

  • मशरूम उत्पादन के स्थान का चयन सामान्यतः शहर से कुछ दूरी पर होना चाहिए । यह स्थान सड़क से जुड़ा होना चाहिए ।
  • इस स्थान पर पानी की उपलब्धता अच्छी होनी चाहिए ।
  • मशरूम भवन की संरचना करने से पहले हवा के बहाव का भी ज्ञान होना आवश्यक है । मशरूम भवन की संरचना हवा के बहाव को ध्यान में रख कर ही करनी चाहिए ।

उदाहरण:  हवा का बहाव कम्पोस्ट बनाने वाले स्थान से उत्पादन कमरों की तरफ नहीं होना चाहिए। स्पैन्ट कम्पोस्ट को हवा की दिशा में ही निकाला जाना चाहिए व इसे उसी दिशा में फेंका जाना चाहिए।

मशरूम फार्म बनने के बाद बरती जाने वाली सावधानियाँ :

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कुछ ऐसे सावधानियां है जो मशरूम फार्म बनाने के बाद भी बरतनी चहिये जैसे :

  • मशरूम फार्म में सफाई की अहम भूमिका होती है ।
  • मशरूम भवन के अंदर व आसपास कहीं भी गन्दगी नहीं होनी चाहिए अन्यथा मशरूम को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े – मकौड़े उस गन्दगी में पनप सकते हैं ।
  • गन्दगी में मशरूम में लगने वाली बीमारियों के कीटाणु व इसके प्रतिस्पर्धी फफूंद के बीज भी पनप सकते हैं जोकि मशरूम की फसल में काफी नुकसान कर सकते हैं और इसकी पैदावार को भी कम कर सकते हैं ।

जब किसी बीमारी का प्रकोप ज्यादा होता है तो सारी की सारी फसल समाप्त हो सकती है इसलिए यह अत्यन्त आवश्यक है कि मशरूम उत्पादन भवन व इसके आस – पास सफाई का विशेष ध्यान रखा जाये , ताकि बीमारी पनप न सके ।

मशरूम की फसल लेते वक्त बरती जाने वाली सावधानियाँ :

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जब मशरूम उत्पादन का समय आता है तो हमें और भी ज्यादा सावधान रहने की जरुरत है। हमारी एक भी लापरवाही से हमारी पूरी फसल भी ख़राब हो सकती या या उत्पादन पे भी असर हो सकता है।

मशरूम की खेती में वही लोग असफल हुए है जिन्होंने ये 10 सावधानियाँ नहीं बरती :

मशरूम की खेती में बरती जाने वाली 10 सावधानियाँ :

( 1 )  मशरुम खाद (कम्पोस्ट ) में प्रयोग होने वाले सामग्री जैसे- पराली, भूसा , मुर्गी की बीट , चोकर , लकड़ी का बुरादा ताजा होना चाहिये व कीटाणुमुक्त होना चाहिए ।

मुर्गी की बीट अगर पुरानी हो तो इससे पीले फफूंद की बीमारी खाद में आने की संभावना बढ़ जाती है । यह पाया गया है कि भूसा अगर पहले बारिश से भीगा हो तो उसकी अच्छी खाद नहीं बनती ।

केसिंग मिट्टी में उपयोग होने वाला गोबर भी अच्छी तरह से 2-3 साल तक गला – सड़ा हुआ होना चाहिए । अगर स्पैन्ट कम्पोस्ट का प्रयोग भी केसिंग मिट्टी में किया जा रहा हो तो यह भी कम से कम 2-3 साल पुरानी गली होनी चाहिए।

( 2 )  जब कम्पोस्ट बनाये तो पक्के फर्श पर ही बनाई जानी चाहिए । कम्पोस्ट बनाना
शुरु करने से पहले फर्श को 2 % फारमोलीन के घोल से धो लेना चाहिए हमारी कम्पोस्ट मैं कोई रोग न लगे।

( 3 )  कम्पोस्ट मैं बीजाई जिस जगह पर की जानी हो उसे अच्छी तरह से साफ करके दो प्रतिशत फारमोलीन के घोल से धो लें ।

मशरूम के बीज जिससे बिजाई की जानी होती है , उसकी अच्छी तरह जांच कर लें कि उसमें कहीं कोई प्रतिस्पर्धी फफूंद व जीवाणु तो नहीं है । अगर बीज की किसी थैली में उस तरह की समस्या हो तो उन थैलियों को बीज के लिए प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए ।

मशरूम की थैली को सुंघ कर भी यह जांच की जा सकती है कि उसमें कोई प्रतिस्पर्धी फफूंद या जीवाणु तो नहीं है । सूंघने पर थैली से मशरूम की सुगन्ध आनी चाहिए।

( 4 )  मशरुम के लिए खाद बनाते समय सभी चीजों को अच्छे से मिलाना चाहिए व खाद में ज्यादा पानी की मात्रा भी ठीक होनी चाहिए । ज्यादा पानी होने पर खाद में बीज नहीं फैलता व कई प्रतियोगी विशेषकर भूरी परत वाला प्रतियोगी , इकी कैप व सूत्रकृमि भी खाद में पनपने लगते हैं , इसी तरह अगर ढिंगरी की खेती के लिए भूसा ज्यादा गीला होगा तो उसमें बीज नहीं फैलेगा।

( 5 )  कम्पोस्ट मैं बीजाई के बाद जिन कमरों में बैगों को रखना है या जिन कमरों में कम्पोस्ट को डालना है उन कमरों को 2-3 दिन पहले 2 % फारमोलीन के घोल का छिडकाव दीवारों पर , छत पर , फर्श , दरवाजों व खिड़कियों पर करके बंद कर देना चाहिए ताकि उसमें किसी तरह के कोई बीमारी के कीटाणु या कोई दूसरे कीड़े – मकोड़े न रहे । मशरूम के कमरों में हर साल चूने से सफेदी भी कर लेनी चाहिए।

(6)  याद रहे अगर मशरूम की खेती में यदि बैगों को रिसाईकल कर रहे हो तो उन्हें गर्म पानी में डाल कर तथा फारमोलीन से उपचार कर कीटाणुमुक्त कर लेना चाहिए।

(7)  जब भी किसी को कमरे में जाना हो तो हमेशा उनके जूतों को 2 % फारमोलीन के घोल में डुबोया जाना चाहिए । इसके लिए कमरे के दरवाजे के बाहर लगभग 3 फुट लम्बा 1.5 फुट चौडा तथा 1 इंच गहरा गड्डा बनाया जाना चाहिए और इसमें प्रतिदिन 2 % फारमोलीन का घोल डाल दें ।

कमरे में प्रवेश करने से पहले इस घोल में जूते आदि डुबो लिए जाते हैं ताकि उनके तलो द्वारा किसी बीमारी के कीटाणु या कोई कीड़े – मकोड़े या सूत्रकृमि अंदर न चले जाए ।

अगर गड्डा नहीं बनाना हो तो बोरी या पायदान का प्रयोग भी कर सकते हैं इसे भी दो प्रतिशत फारमोलीन के घोल में गीला करना चाहिए। मशरूम तोड़ने में उपयोग में लाए जाने वाले औजार भी प्रयोग करने से पहले व उपयोग करने के बाद अच्छी तरह साफ कर लेने चाहिए । 

(8)  मशरूम तोड़ने के बाद नीचे का हिस्सा जिसे काट कर फेंक देते हैं , अगर थैले में केसिंग मिट्टी में ही रह जाए तो उनको निकाल लेना चाहिए । इसके तुरंत बाद इन गड्डों को तुड़ाई के एक दम बाद केसिंग मिट्टी से भर देना चाहिए ।

(9) मशरूम के नीचले कटे हुए हिस्सों को भी किसान उपयोग मैं ला सकता है।
मशरुम के इन हिस्सों मैं भी मशरुम की तरह भरपूर मात्रा मैं प्रोटीन होता है। किसान इनको अपने पशुओ को दे सकता है इस से उनके पशुओ की दूध उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है।

 

(10) मशरुम अगर खुली हुई व रोग ग्रसित हो तो इसको थैलों पर नहीं छोड़ना चाहिए इन्हें निकालने के तुरंत बाद फारमोलीन के घोल में डाल देना चाहिए । मशरूम उत्पादन हेतु रखे थैलों पर रोग , प्रतिस्पर्धी फफूंद , सूत्रकृमि आदि का आगमन न हो इसके लिए विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए और कहीं आ ही जाता है तो ऐसे थैलों को तुरंत अलग कर देना चाहिए , ताकि बीमारी अन्य थैलों में न फैले ।

मशरूम की फसल लेने के बाद बरती जाने वाली सावधानियाँ :

(1) जो कम्पोस्ट फसल लेने के बाद बच जाती है उसको कक्ष के पास ही नहीं फेंकना चाहिए और अगर सम्भव हो तो इसे बड़े – बड़े गड्डों में दबा देना चाहिए । 2-3 वर्षों के बाद इससे अत्यन्त उपजाऊ खाद बन जाती है जो आप के खेतो मैं काम आ जाते है । फसल लेने के बाद यदि ट्रे उपयोग में लाई गई तो इन्हें 2 % फारमोलीन के घोल में डुबो कर संक्रमणहीन कर लेना चाहिए ।

(2) फसल लेने के बाद कमरे में 2 % फारमोलीन का छिड़काव कर लेना चाहिए ।

(3) फसल लेने के दौरान कोई भी ऐसा उपकरण प्रयोग में नहीं लाना चाहिए जिसे चलाने के लिए खनिज तेल का उपयोग होता हो, क्यों की ये आप की फसल हो खराब कर सकता है ।

(4)  कीड़े मकौड़ों व रोग को फसल तोड़ते समय खत्म करने के लिए कुछ दवाईयां उपयोग में लाई जाती है इनमें डेसिस ( 0.05 प्रतिशत घोल ), कवच ( 0.1 प्रतिशत घोल ) व मैलाथियान ( 0.05 प्रतिशत घोल ) ज्यादातर प्रयोग में लाई जाती है । जब भी फसल तोड़ते समय दवाई का प्रयोग किया जाये तो इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि इसका प्रयोग फ्लश ब्रेक के दौरान हो और छिड़काव करने के बाद कम से कम 2-3 दिन मशरूम की तुड़ाई न करें ।

(5) मशरुम की नई फसल लगाने से पहले हमेशा कमरे में अच्छी तरह से साफ सफाई कर लेनी चाहिए और अगर मुमकिन हो तो कमरों में चूना करवा लेना चाहिए ।

निष्कर्ष :

मशरुम उगाते समय इन सावधानियों पर अम्ल करते हुए मशरूम की खेती करने से मशरूम की खेती लगातार कई वर्षों तक की जा सकती है और उत्पादक अच्छा लाभांश कमा सकता है ।

परन्तु यदि ये सावधानियां न बरती जाये तो किसान शुरु में तो 1-2 फसल अच्छी पैदा कर लेता है लेकिन उसके बाद धीरे – धीरे पैदावार कम होने लगती है , और एक समय ऐसा आ जाता है जब उत्पादन बिल्कुल बन्द हो जाता है , और किसान उत्पादन करना बन्द कर देता है।

अगर किसान इन जानकारियों पे अमल करे तो ऐसे नौबत नहीं आती है और वो सालो साल मशरुम की खेती कर सकता है ।

मशरूम की खेती की ट्रेनिंग :

भारत मैं मशरुम की खेती का प्रशिक्षण बागवानी विभाग से ले सकते है इसकी वेबसाइट https://hortnet.gov.in/ है।

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SUNIL YADAV
I was born into a farmer's family in a village near Banaras. I completed my studies in mechanical engineering and I am the first engineer in my village. Since childhood, I have been more attracted to nature and wanted to do something that would keep me connected to farms and farmers. I love to do research and collect the latest information about agriculture, horticulture and then I write articles about them. If my farmer brothers benefit even a little from the articles I write, I will consider myself very lucky.

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